
मुंबई: वयोवृद्ध फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार को कल देर रात हृदयाघात के बाद यहां के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। लीलावती अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि दिलीप कुमार को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया। उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है ।
अस्पताल सूत्रों ने बताया कि उनको हृदयाघात हुआ है लेकिन उनको जीवन रक्षक प्रणाली ‘वेंटिलेटर’ पर नही रखा गया है वह होश में हैं। वह 90 साल से अधिक के हैं, इस लिहाज से आने वाले 48 से 72 घंटे उनके लिए बेहद अहम हैं।
जाने-माने अभिनेता को अस्पताल के आईसीयू में हृदयरोग विशेषज्ञ डा.नितिन गोखले की निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के एक डाक्टर ने बताया कि हृदय की आंतरिक दीवार के पास होने वाले हृदयघात खतरनाक होते हैं। दिलीप कुमार को भी इसी तरह का हृदयघात हुआ है।
बायकुला के सरकारी जे जे अस्पताल के हृदयरोग विभाग के प्रमुख डा नरेंद्र बंसल ने बताया कि इस तरह का हृदयाघात साधारणतया तभी होता है जब दिल के एक हिस्से में खून की आपूॢत बंद हो जाती है। उन्होंने बताया कि बुढ़ापे के अलावा कई अन्य कारणों से भी इस तरह का हृदयाघात होता है। इस उम्र में उनका आपरेशन कोई समझदारी भरा फैसला नहीं है ऐसे में उनका इलाज करने वाले डाक्टरों के पास दवाइयों की मदद लेने का ही रास्ता बचा है।
नब्बे वर्षीय दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसम्बर 1922 को पेशावर में हुआ जो अब पाकिस्तान में है। उनका फिल्म जीवन काफी लंबा रहा और उन्होंनें छह दशक तक रूपहले पर्दे पर राज किया और फिल्म फेयर अवार्ड के 1954 में शुरू होने के बाद दिलीप कुमार ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पहला फिल्म फेयर अवार्ड भी हासिल किया। इसके बाद आठ बार उन्होंने यह खिताब जीता। उनके अलावा शाहरूख खान ही बालीवुड के एकमात्र अभिनेता है जिन्होंने आठ बार इस खिताब पर कब्जा किया है।
उन्होंने ‘देवदास’, ‘कर्मा’, ‘क्रांति’ जैसी यादगार फिल्मों में अभिनय किया। भारतीय फिल्मों में योगदान के लिए उन्हें 1991 में पद्म भूषण तथा 1994 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
दिलीप कुमार को सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2000 से 2006 के लिए राज्य सभा का सदस्य भी चुना गया। न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान सरकार ने भी सिनेमा जगत के इस अजीम कलाकार को अपने यहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (निशान-ए-इम्तियाज) से सम्मानित किया।
